
EPISODE 20
पिछले एपिसोड में आपने पड़ा ,
"इस पूर्णिमा से पहले हमें उसे खोजना होगा, इससे पहले कि उस तक कोई और पहुँचे। ईशान! अब तुम्हें उसे सिर्फ खोजना ही नहीं है... याद रहे, जिस मकसद के लिए हम यहाँ आए हैं, कई सदियों से यहाँ कैद अपने 'मालिक' को जगाने के लिए उसका यहाँ होना ज़रूरी है।"
ईशान ने खामोशी से उस यंत्र के बीच तड़पती लड़की को देखा। तांत्रिक ने अपनी आवाज़ और डरावनी कर ली:
"हमसे पहले अगर उसने (रक्षक ने) उस लड़की को खोज लिया, तो मालिक को जगाना मुश्किल हो जाएगा। ईशान, अपना काम तेज़ी से करो! समय रेत की तरह फिसल रहा है... और इस बार अगर मालिक नहीं जागे, तो हम सब भस्म हो जाएंगे!"
ईशान के होंठों पर एक कड़वी मुस्कान आई। उसने अपनी जेब से एक पुरानी घड़ी निकाली जिसकी सुइयाँ उल्टी दिशा में चल रही थीं। "मालिक जागेंगे... और वो लड़की (गनिका) खुद चलकर इस यंत्र के बीच आएगी। रक्षक उसे अपनी ढाल बना रहा है, पर उसे नहीं पता कि वही ढाल उसकी मौत का कारण बनेगी।"
उधर कॉलेज के गार्डन में, गनिका ने अचानक अपना हाथ अपने गले पर रखा। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसका गला घोंट रहा हो। कोमल (आत्मा) उसके पैरों के पास सिमट गई थी और लगातार रो रही थी।
तभी तन्मय सीढ़ियों से उतरकर गनिका के ग्रुप की तरफ बढ़ने लगा। उसने गनिका को देखा, जो पसीने से तर-बतर थी। तन्मय को अभी तक नहीं पता था कि उसकी 'भाभी' सिर्फ अभिनव की पत्नी नहीं, बल्कि उस प्राचीन लड़ाई का सबसे बड़ा केंद्र है जिसे जीतने के लिए शैतान बेताब हैं।
अब आगे.......
ईशान ने उस प्राचीन घड़ी को वापस अपनी जेब में रखा और अपनी आँखों पर चश्मा चढ़ा लिया। देखते ही देखते उसकी आँखों की वह लाल वहशत एक सौम्य प्रोफेसर की चमक के पीछे छिप गई।
"पूर्णिमा दूर नहीं है," ईशान ने तांत्रिकों की ओर पीठ फेरते हुए कहा। "मालिक की मुक्ति के लिए उस 'धरोहर' (गनिका) का रक्त और रक्षक की हार... दोनों तय हैं। मैं वापस जा रहा हूँ, कॉलेज में मेरी मौजूदगी पर किसी को शक नहीं होना चाहिए।"
जैसे ही ईशान जंगल के उस अंधेरे से बाहर निकला, पीछे से यंत्र के बीच बैठी वह हिप्नोटाइज्ड लड़की ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगी—एक ऐसी हंसी जिसमें इंसानी आवाज़ कम और किसी प्रेत की गूँज ज़्यादा थी।
उधर कॉलेज के गार्डन में, धूप अब ढलने लगी थी। गनिका को रह-रहकर कंपकंपी छूट रही थी। नील उसे कुछ चुटकुले सुना रहा था, पर गनिका का ध्यान कहीं और था।
तभी तन्मय सीढ़ियों से उतरकर बहुत ही 'कूल' अंदाज़ में उनके ग्रुप की तरफ बढ़ा। उसने अपनी जैकेट ठीक की और सीधे उनकी बेंच के पास आकर रुका। अभिनव की दी हुई 'डेडलाइन' उसके दिमाग में गूँज रही थी।
कॉलेज के गार्डन में तन्मय गनिका के ग्रुप की तरफ बढ़ रहा था। उसने अपने चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान ओढ़ ली थी जैसे वो इस कॉलेज का कोई आवारा सा स्टूडेंट हो। अभिनव के साथ उसका क्या रिश्ता है, ये बात इस पूरे कैंपस में सिर्फ उन दोनों के बीच दफन थी।
तन्मय ने अपनी जैकेट की चेन थोड़ी नीचे की और बहुत ही बेफिक्र अंदाज़ में गनिका, नील, सिया और रिया की बेंच के पास पहुँच गया।
"हेल्प! क्या कोई मुझे बता सकता है कि यहाँ की सबसे कड़क कॉफ़ी कहाँ मिलती है?" तन्मय ने अपनी सबसे 'इनोसेंट' आवाज़ में पूछा।
नील, जो गनिका को हंसाने की नाकाम कोशिश कर रहा था, उसने ऊपर देखा। "भाई, तू नया है क्या? कॉफ़ी तो कैंटीन में मिलती है, पर यहाँ हम अपनी 'पहाड़ी चाय' पीते हैं।"
तन्मय हंसते हुए बैठ गया। "हाँ, आज ही जॉइन किया है। मैं तन्मय। तुम लोग तो यहाँ के पुराने खिलाड़ी लगते हो।" तन्मय की नज़र गनिका पर गई, जो अभी भी पसीने से तर-बतर थी। उसे अंदर ही अंदर घबराहट हो रही थी " पहली बार तन्मय गणिका से मिल रहा था अभि की बीवी WOW बोले तो मेरी भाभी ! गॉड भाभी को देख कर समझ आ रहा है अभी ने क्यों गुपचुप शादी कर ली और अपने बेस्ट फ्रेंड को भी नहीं बताया , हुह्ह गद्दार कही का " ये सब तन्मय खुद से अपनी सोच में कह रहा था।
तभी कॉलेज के लाउडस्पीकर से एडमिनिस्ट्रेशन की आवाज़ गूँजी:
"अटेंशन स्टूडेंट्स! एक बहुत बड़ी खुशखबरी! इस साल MIAM का रिज़ल्ट पूरे मनाली और हिमाचल रीजन में नंबर-1 रहा है! हमारे छात्रों ने टॉप किया है!"
पूरा कैंपस शोर से भर गया। तभी अगला बड़ा धमाका हुआ:
"इस ऐतिहासिक जीत की खुशी में, परसों शाम कॉलेज में एक 'ग्रैंड विक्ट्री गाला' (Grand Victory Gala) पार्टी होगी! ड्रेस कोड 'एलिगेंट' है और सबका आना ज़रूरी है!"
तन्मय ने पार्टी की बात सुनी तो मन ही मन चहक उठा— "पार्टी? वाह! अब आएगा असली मज़ा।
उसने गनिका की ओर देखते हुए कहा, "अरे, तुम तो ऐसे डरी हुई हो जैसे पार्टी में नहीं, श्मशान जा रही हो! सेलिब्रेट करो यार, मनाली नंबर-1 आया है!"
गनिका ने सिर्फ एक फीकी मुस्कान दी। उसे पता नहीं था कि यह 'अजनबी' लड़का उसके पति का सबसे करीबी दोस्त है।
पार्किंग में खड़ी ज़ोया ने जब पार्टी की बात सुनी, तो उसके दिमाग में शैतानी आइडिया आने लगे। उसने देखा कि तन्मय उन 'लोकल' स्टूडेंट्स के साथ घुला-मिला बैठा है। हाऊ चीप ये इन लोगो के ही लायक है
पुराने ऑडिटोरियम के पीछे सन्नाटा था। सिर्फ पेड़ों के पत्तों की सरसराहट सुनाई दे रही थी। अभिनव वहाँ पहले से मौजूद था, अपनी पीठ दीवार से सटाए, अंधेरे में किसी साये की तरह घुला हुआ। उसकी नीली आँखें अंधेरे में भी हल्की चमक रही थीं।
तभी दबे पांव तन्मय वहाँ पहुँचा। उसने चारों तरफ चौकन्ना होकर देखा कि कोई उसका पीछा तो नहीं कर रहा।
"भाई! इस अजनबी बनने के चक्कर में मेरी हालत खराब हो रही है," तन्मय ने फुसफुसाते हुए अपनी जैकेट झाड़ी। "तेरे उन दोस्तों के ग्रुप में घुसना तो आसान था, पर नील नाम का वो लड़का इतना बोलता है कि मेरा सिर चकरा गया।"
अभिनव अंधेरे से बाहर निकला।उसका चेहरा गंभीर था। तन्मय शकी नज़रो से अभिनव को देखते हुए बोला एक बात बता अभी !
अभिनव ने उसकी तरफ एक आइब्रो ऊपर करके देखा जैसे कह रहा हो बोल ?
तेरी सच में शादी हुई है न ?'
अभिनव ने घूरते हुए तन्मय को देखा और कहा क्या मतलब है तेरा। "
दोस्तों, 'सच या सपना' की यह कहानी अब उस मोड़ पर आ गई है जहाँ रोशनी और अँधेरे के बीच की लकीर धुंधली पड़ती जा रही है। एक तरफ कॉलेज की जीत का शोर है, गुब्बारे हैं और जश्न की तैयारी है... लेकिन दूसरी तरफ उसी सन्नाटे में एक मौत का जाल बुना जा रहा है।
"क्या आपने महसूस किया? जहाँ जश्न का शोर सबसे ज़्यादा होता है, वहीं अक्सर किसी की चीखें दब जाती हैं।"
कैसा लगा आज का यह एपिसोड? क्या गनिका को उस पार्टी में जाना चाहिए? अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर बताएं, क्योंकि आपकी एक दुआ गनिका की ढाल बन सकती है! ⚡🔥🖤


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