
Chapter 30
पिछले एपिसोड में आपने पढ़ा,
"तू पागल है माधुरी," अप्सरा ने मुस्कुराते हुए कहा। "वो बस नया आया है, इसलिए थोड़ा 'Friendly' होने की कोशिश कर रहा है। तू तो उसे सीधा 'Life Partner' ही मान बैठी है।"
"Friendly?" माधुरी चहक उठी। "अरे, तूने देखा नहीं जब उसने पेन उठाया? उसके हाथ की वो 'Vibe'... उफ़! मेरा तो पूरा 'System' ही हैंग हो गया था। तू कितनी 'Lucky' है यार, कम से कम उसने तुझसे बात तो की। मुझसे तो शायद मेरा नाम भी न पूछे।"
माधुरी अपनी ही बातों पर शरमा गई और अपनी किताबों से चेहरा छिपा लिया। "पर यार, सच कहूँ तो उस प्रोफेसर अधिराज से मुझे अभी भी 'Chills' आते हैं। वो जिस तरह तुझे देखते हैं... ऐसा लगता है जैसे तू उनकी कोई ऐसी 'Lost Treasure' है जो उन्हें सदियों बाद मिली हो। उनका 'Possessiveness' लेवल एकदम 'Next Level' है, भाई!"
अप्सरा का हाथ अनजाने में उसकी कलाई पर चला गया, जहाँ अभी भी अधिराज के उस बर्फीले स्पर्श की हल्की सी सिहरन बाकी थी। "तुझे... तुझे सच में ऐसा लगता है कि वो 'Possessive' हैं?"
अब आगे.......
"अंधा भी बता देगा!" माधुरी ने फुसफुसाते हुए कहा। "पूरे कॉलेज में वो सिर्फ देखते है मैंने बोहोत बार नोटिस करा हैं। और उनकी वो आवाज़... 'Heavy' और 'Dark'। ऐसा लगता है जैसे वो तुझे दुनिया से छुपा कर कहीं बंद कर देंगे। देख, मेरा तो आर्यन पर 'Crush' है, पर तेरे लिए तो मुझे उस 'Dark Professor' से डर लगता है।"
Star Hotel ka Dark Secret
मुंबई का आलीशान सुइट (रात के 12:15 बजे)
कमरे की हवा में सिगरेट के धुएं और महंगी शराब की गंध घुली हुई थी। आर्यन बेड पर नीम-अंधेरे में बैठा था, उसका अंदाज ऐसा था जैसे उसे किसी की भावनाओं की कोई परवाह नहीं। मोना वहां खड़ी थी, लेकिन आर्यन की नजरें उसके चेहरे पर नहीं, बल्कि कमरे में बिखरी उन चीजों पर थीं जो उसकी अय्याश जिंदगी का सबूत थीं।
मेज पर रखे उसके फोन पर लगातार अलग-अलग लड़कियों के 'Notices' और 'Messages' फ्लैश हो रहे थे—किसी का नाम 'प्रिया' था, तो किसी का 'रिया'। आर्यन के लिए यह सिर्फ नाम नहीं, बल्कि उसके जीते हुए 'Trophies' की एक लंबी लिस्ट थी।
आर्यन ने एक लंबी सांस ली और अपनी दराज (Drawer) से एक छोटा सा बॉक्स निकाला जिसमें कई लड़कियों के झुमके और अंगूठियां पड़ी थीं। उसने मोना की तरफ देखते हुए बहुत ही बेपरवाह लहजे में कहा:
जब मोना ने उसे उसकी पुरानी बातों की याद दिलाने की कोशिश की, तो आर्यन जोर से हंसा और बोला:
"Sweetheart, वो सब तो 'Scripted' था। तुम्हें क्या लगा, आर्यन सिर्फ पढ़ाई करता है? मेरी रातें इन '5-Star Suites' में गुजरती हैं, और हर रात 'Partner' बदल जाता है। मैंने अपनी लाइफ को पूरी तरह 'Playboy' मोड पर रखा है। तुम्हारी जैसी लड़कियां मेरे 'Charming Face' पर मरती हैं, और मैं तुम्हारी 'Weakness' का फायदा उठाता हूँ। अब ड्रामा बंद करो और इस 'Luxury' का मज़ा लो, क्योंकि कल तक मैं तुम्हारा नाम भी भूल चुका होऊँगा।"
आर्यन की पूरी 'Good Boy' इमेज एक धोखा है। वो अपनी अय्याशी को एन्जॉय करता है और उसे अपनी इस फितरत पर कोई शर्म नहीं है।
आर्यन के चेहरे पर एक ऐसी चमक थी जो केवल उन लोगों में होती है जिन्हें दूसरों के दिल तोड़ने का पुराना तजुर्बा हो। मोना को अब समझ आ रहा था कि जिसे वो प्यार समझ रही थी, वो आर्यन के लिए सिर्फ एक 'Weekend Entertainment' था। उसके फोन की स्क्रीन फिर से जली, एक और नई लड़की का मैसेज आया था। आर्यन ने मोना की तरफ देखा तक नहीं और अगले शिकार की प्लानिंग में मशगूल हो गया।
होटल के सुइट में वक्त जैसे ठहर गया था। खिड़की से आती नीली रोशनी आर्यन के चेहरे पर पड़ रही थी, जो अब किसी मसीहा का नहीं बल्कि एक बेरहम शिकारी का लग रहा था। मोना की आँखों में आँसू जम गए थे। उसके कानों में आर्यन के शब्द किसी ज़हरीले तीर की तरह चुभ रहे थे।
मोना को लगा जैसे उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई हो। जिस इंसान के लिए उसने दुनिया से लड़ने की कसम खाई थी, जिसे उसने अपनी रूह का हिस्सा माना था, उसके लिए वह महज़ एक 'ज़रूरत' थी। एक ऐसी ज़रूरत जो हर रात किसी नए चेहरे के साथ बदल जाती थी।
आर्यन ने सिगरेट का धुआँ हवा में उछाला और अपनी दराज़ से एक पुरानी लेदर की डायरी निकाली। उसने उसे लापरवाही से मेज पर पटक दिया। डायरी के पन्नों में दर्जनों लड़कियों की तस्वीरें और उनके नाम लिखे थे—सब के सब आर्यन के 'गुज़रे हुए कल' के मोहरे थे।
आर्यन ने मोना के कांपते हुए हाथों को देखा और बड़ी बेरुखी से बोला:
"मोना, अपनी इन आँखों को बेकार में 'Waste' मत करो। ये जो तुम जिसे 'Love' समझ रही हो, वो मेरे लिए सिर्फ एक 'Physical Need' है। मेरा बिस्तर हर रात एक नया 'Guest' मांगता है, और तुम भी उनमें से एक थी। तुमने शायद बहुत सारे 'Dreams' देख लिए थे, पर मेरी लाइफ में 'Commitment' जैसा कोई शब्द ही नहीं है। कल तुम होगी, परसों कोई और होगी... यह सिलसिला ऐसे ही 'Continue' रहेगा।"
मोना जब फूट-फूट कर रोने लगी, तो आर्यन ने उसकी तरफ एक टिश्यू बॉक्स बढ़ाते हुए ठंडे लहजे में कहा:
"ये 'Emotional Drama' बंद करो, मुझे इससे चिढ़ होती है। तुम्हें क्या लगा, तुम वो 'Special' लड़की हो जो एक 'Player' को बदल देगी? ऐसी गलतफहमी पालने वाली तुम कोई पहली लड़की नहीं हो। मैंने अपनी 'Appetite' और 'Ayyashi' के लिए न जाने कितनी जिंदगियां इस्तेमाल की हैं। तुम मेरे लिए बस एक 'Routine' का हिस्सा हो। अब ये आंसू पोंछो और अपनी 'Reality' स्वीकार करो, क्योंकि मेरे पास 'New Faces' की कोई कमी नहीं है।"
मोना के पास कहने को कुछ बचा ही नहीं था। उसका रोना उस कमरे की दीवारों से टकराकर दम तोड़ रहा था। उसे अहसास हो गया था कि आर्यन कोई ऐसा लड़का नहीं जिसे सुधारा जा सके, बल्कि वो एक ऐसा दलदल है जिसमें वह खुद खुशी-खुशी उतर गई थी। आर्यन ने अपने फोन में एक और लड़की का नंबर डायल किया और मोना को ऐसे नज़रअंदाज़ कर दिया जैसे वो उस कमरे में मौजूद ही न हो।
मुंबई की वो रात मोना के लिए उम्र भर का एक ऐसा जख्म बन गई थी, जिसकी टीस शायद कभी कम न हो।
मुंबई की उसी काली रात का एक दूसरा पहलू शहर के दूसरी तरफ अप्सरा के कमरे में दिख रहा था। होटल की उस गंदगी और अय्याशी से दूर, यहाँ एक अलग ही किस्म का रहस्य पनप रहा था।
रात के सन्नाटे में घड़ी की सुइयां एक-दूसरे के ऊपर से गुजर रही थीं। अप्सरा के कमरे में वक्त जैसे थम सा गया था। कमरे के कोने में लगी कुर्सी पर प्रोफेसर अधिराज बैठे थे, या शायद वो खड़े थे उन्हें खुद भी वक्त का होश नहीं था।
सुबह के तीन (3:00) बज चुके थे। पिछले चार घंटों से अधिराज की नजरें अप्सरा के मासूम चेहरे से एक पल के लिए भी नहीं हटी थीं। चांद की चांदनी अब ढलने लगी थी, पर अधिराज की आँखों में जो चमक थी, वह किसी इबादत से कम नहीं थी।
अधिराज ने अपनी पलकें तक नहीं झपकाईं थीं। उनके मन में एक अजीब सा खौफ था—मानो अगर उन्होंने एक सेकंड के लिए भी अपनी आँखें बंद कीं, तो अप्सरा किसी धुएं की तरह उनकी नज़रों से ओझल हो जाएगी। उनकी आँखों में थकान नहीं, बल्कि एक रूहानी प्यास थी।
जैसे ही दूर कहीं परिंदों की चहचहाहट सुनाई दी, अधिराज को अहसास हुआ कि सूरज निकलने वाला है। उन्होंने कांपते हुए हाथों से अप्सरा के माथे के पास बिखरे बालों को छुआ, पर उसे जगाया नहीं। उन्होंने फिर से उसके माथे को चुम लेता है ।
एक हफ्ते बाद…
पूरा एक हफ्ता बीत चुका था।
और इस पूरे हफ्ते में प्रोफेसर अधिराज कॉलेज नहीं आए थे।
कॉलेज के गलियारों में अब उनकी चर्चा किसी रहस्य की तरह फैल चुकी थी।
किसी ने कहा
“सुना है वो किसी रिसर्च के लिए बाहर गए हैं।”
किसी ने फुसफुसाकर कहा
“नहीं… मैंने तो सुना है कि वो अचानक बीमार पड़ गए।”
और कुछ लड़कियाँ तो बस उनकी आँखों और आवाज़ की बातें करते-करते ही खो जाती थीं।
लेकिन अप्सरा के लिए यह सब सिर्फ अफवाहें नहीं थीं। उसके भीतर एक अजीब-सी बेचैनी घर कर चुकी थी।
कैंपस के बगीचे में खड़ी अप्सरा दूर आसमान को देख रही थी।
माधुरी उसके पास आई और हँसते हुए बोली—
“क्या बात है मैडम? एक हफ्ते से तुम किसी खोई हुई हीरोइन जैसी घूम रही हो।”
अप्सरा चौंक गई।
“न… नहीं तो।”
लेकिन अप्सरा के लिए, इन सात दिनों का हर लम्हा किसी सजा से कम नहीं था। उसे रह-रहकर उस रात का अहसास होता था, जैसे कोई साया उसके सिरहाने खड़ा था। वो 'बर्फीला स्पर्श' जो अब उसकी रूह में बस चुका था।
"रिसर्च?" मधुरी ने कैंटीन में समोसा तोड़ते हुए कहा। "मुझे तो लगता है कि वो किसी को 'Hunt' करने गए हैं। उनकी आँखों में वो शिकारी वाली चमक देखी थी तूने? वैसे यार, वो गायब क्या हुए, कॉलेज की हवा ही बदल गई है। आर्यन भी आजकल कुछ ज्यादा ही 'Busy' रहने लगा है।"
अप्सरा ने कुछ नहीं कहा। उसकी नजरें कॉलेज के उस भारी लोहे के गेट पर टिकी थीं, जहाँ से अधिराज की काली कार अंदर आती थी। तभी उसकी नजर मोना पर पड़ी।
सॉरी guys कल मैं बिजी बोहोत थी तो एपिसोड नहीं लिख पाई लेकिन आज का एपिसोड लेंथी लिख रही हूँ
कल मिलते हैं अगले एपिसोड में, "दैत्य और अप्सरा" के साथ! तब तक के लिए शुभरात्रि!


Write a comment ...