01

हुसन की चांदी


                                                                                         Chapter 1


सड़क पर एक लड़की नंगे पैर जल्दी-जल्दी चल रही थी… जैसे वक्त उसके पीछे दौड़ रहा हो और वो उससे आगे निकल जाना चाहती हो।
उसकी चाल में घबराहट थी, पर चेहरे पर एक अजीब-सी खामोशी… जैसे वो डर को भी अपने अंदर दबाकर चल रही हो।
चारों तरफ ट्रैफिक का शोर था।
गाड़ियाँ तेज़ी से निकल रही थीं, हॉर्न की आवाज़ हवा को चीरती जा रही थी…
लेकिन लड़की किसी और ही दुनिया में थी।
वो बार-बार अपने कदम तेज़ करती…
फिर अचानक रुककर पीछे देखती…
और फिर उसी बेचैनी के साथ आगे बढ़ जाती।
तभी सड़क के दूसरी तरफ से एक काले रंग की फॉरच्यूनर तेज़ी से निकली और उसके साथ ही धीमी होने लगी… जैसे ड्राइवर ने अचानक ब्रेक पर पैर रख दिया हो।
गाड़ी के अंदर चार लड़के थे।
तीन दोस्त आपस में हँस रहे थे, बातें कर रहे थे…
लेकिन जैसे ही आगे बैठे लड़के की नजर उस लड़की पर पड़ी, उसकी हँसी वहीं की वहीं रुक गई।
उसकी आँखें जैसे पलभर के लिए भूल गईं कि झपकना भी होता है।
लड़की… इतनी सुंदर थी कि कोई उससे नजर हटा ही नहीं सकता था।
उसके खुले बाल हवा में हल्के-हल्के उड़ रहे थे,
चेहरे पर थकान थी… लेकिन फिर भी उसकी खूबसूरती किसी चमकती चीज़ की तरह भीड़ से अलग दिख रही थी।
वो लड़का बस देखता रह गया।
उसके दोस्त ने उसे कोहनी मारकर कहा,
“कहाँ खो गया भाई…?”
लेकिन वो जवाब नहीं दे पाया।
उसकी नजर अब सिर्फ उसी पर थी…
और उसकी आँखों में पहली बार किसी चीज़ ने दिलचस्पी नहीं, बल्कि खिंचाव पैदा किया था।
जैसे वो लड़की…
किसी आम दुनिया की नहीं थी।
फॉरच्यूनर थोड़ा और स्लो हुई…
और अगले ही पल, लड़की ने जैसे ही सड़क पार करने के लिए कदम बढ़ाया,
एक-एक करके…
गाड़ी में बैठे बाकी तीनों दोस्तों की भी नजर उस लड़की पर पड़ी।
पहले वाला जो पीछे सीट पर था, उसने झट से खिड़की से सिर बाहर निकाला…
और फिर उसकी आँखों में वही नशे वाली चमक तैर गई।
दूसरा दोस्त, जो अभी तक हँस रहा था, अचानक चुप हो गया।
उसने बोतल को हाथ में घुमाया… और टेढ़ी मुस्कान के साथ बोला,
“ओये… ये तो… कमाल है यार…”
तीसरा दोस्त, जिसकी सांसों से शराब की तेज़ गंध साफ़ महसूस हो रही थी,
धीमे से सीट पर आगे झुका…
उसकी नजर लड़की के नंगे पैरों पर गई… फिर उसके चेहरे पर…
और वो जैसे खुद को रोक ही नहीं पाया।
“इतनी रात को… अकेली?”
उसने होंठ दबाकर कहा,
“लगता है किस्मत आज… बहुत मेहरबान है…”
तीनों ने शराब पी रखी थी।
उनकी बातें लड़खड़ा रही थीं,
उनकी हँसी में शराफत नहीं…
बस वो गंदी सी बेताबी थी
जो अक्सर नशे के साथ इंसान के अंदर का असली चेहरा बाहर ले आती है।
लड़की को अभी भी पता नहीं था…
कि उसकी तरफ चार जोड़ी आँखें
एक साथ टिक चुकी हैं।
लेकिन जैसे ही फॉरच्यूनर उसके बराबर में आकर धीमी हुई,
उसे हवा में कुछ अलग सा महसूस हुआ…
जैसे…
किसी की नजरें उसकी त्वचा पर चुभ रही हों।
उसने बिना देखे ही अपनी चाल और तेज़ कर दी।
और तभी…
गाड़ी के अंदर बैठे एक दोस्त ने खिड़की से बाहर झुककर आवाज़ लगाई—
“ए सुन…!”
उसकी आवाज़ में हँसी थी…
और उस हँसी में इज्ज़त नहीं थी।
लड़की ने पलटकर नहीं देखा।
बस कदम और तेज़ कर लिए।
तभी वही दोस्त, शराब के नशे में और भी बेहूदा होकर बोला—
“अरे रुक जा ना… डर क्यों रही है?”
और अंदर बैठा दूसरा दोस्त हँसते हुए बोला,
“भाई… आज तो मज़ा आ गया…”
एक लड़का झट से गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर नीचे उतरा…
और सीधे उस लड़की के सामने आकर खड़ा हो गया।
लड़की ने कदम रोक दिए।
उसकी सांस तेज़ थी… आँखें चौकन्नी… और चेहरा शांत रखने की कोशिश में भी काँप रहा था।
लड़के ने हल्की-सी मुस्कान दबाते हुए, रास्ता रोककर कहा—
“बड़ी जल्दी में हो…”
फिर उसने ऊपर से नीचे तक उसे देखा, जैसे वो इंसान नहीं कोई चीज़ हो।
“कहीं जाना हो तो… हम छोड़ देते हैं।”
लड़की ने एक पल भी जवाब नहीं दिया।
बस अपनी नजरें उसकी आँखों में डालकर… एक कदम पीछे हुई।
लेकिन लड़का फिर आगे बढ़ा।
उसकी आवाज़ अब भी मीठी थी, पर इरादा कड़वा।
“इतनी रात… नंगे पैर… अकेली?”
वो हँसा,
“डर मत… हम कोई बुरे लोग थोड़ी हैं।”
उसी वक्त फॉरच्यूनर के अंदर से उसके दोस्त भी हँसने लगे।
किसी ने शीशा नीचे किया और आवाज़ आई—
“हाँ-हाँ… भाई सही कह रहा है… बैठ जा बस!”
लड़की ने अपने हाथ कसकर मुट्ठी में बांध लिए।
उसकी उंगलियाँ हल्की काँप रही थीं…
वो बिना बोले दूसरी तरफ से निकलने लगी।
तभी लड़के ने उसका रास्ता फिर रोक दिया…
और इस बार उसका हाथ आगे बढ़ा, जैसे वो उसे पकड़ने ही वाला हो—
लेकिन उसी पल…
लड़की के आसपास की हवा अचानक ठंडी हो गई।
सड़क पर दौड़ती गाड़ियाँ थीं…
लोग थे… शोर था…
फिर भी, उस एक सेकंड में…
ऐसा लगा जैसे दुनिया ने सांस रोक ली हो।
और लड़की ने पहली बार धीरे से होंठ खोले…
आवाज़ बहुत हल्की थी… पर असर भारी—
“हटो…”
लड़का पलभर को ठिठका…
जैसे उसकी रीढ़ में किसी ने बर्फ रख दी हो।
फिर भी वो हँस पड़ा, नशे में चूर—
“ओहो… आवाज़ भी कितनी प्यारी है…”
लड़की ने सिर हिलाकर बहुत धीमे से कहा…
“न-नहीं… मुझे कहीं नहीं जाना…”
उसकी आवाज़ काँप रही थी, लेकिन वो कोशिश कर रही थी कि वो कमज़ोर ना लगे।
वो पीछे हटने लगी… एक कदम… फिर दूसरा…
पर सामने वाला लड़का मुस्कराया, जैसे उसे उसका डर मज़ेदार लग रहा हो।
“अरे इतना क्या डरना…”
उसने हाथ आगे बढ़ाया,
“बस गाड़ी में बैठ जा…”
लड़की ने तुरंत अपना हाथ पीछे कर लिया।
“मत छुओ मुझे…” उसने घबराकर कहा।
और यही बात… जैसे उन चारों को चुभ गई।
गाड़ी के अंदर बैठे तीनों दोस्त भी उतर आए।
शराब के नशे में लड़खड़ाते हुए,
लेकिन उनके कदमों में वो बेवकूफी वाली हिम्मत थी
जो गलत इंसानों को और भी खतरनाक बना देती है।
धीरे-धीरे…
चारों ने उसे घेर लिया।
एक आगे, एक पीछे…
और दो दोनों तरफ।
लड़की की सांसें तेज़ हो गईं।
उसने इधर-उधर देखा…
सड़क पर गाड़ियाँ जा रही थीं,
लेकिन कोई भी रुक नहीं रहा था।
कोई भी… उसकी तरफ देख नहीं रहा था।
जैसे वो अकेली नहीं…
अदृश्य हो गई हो।
“भागने का मत सोच…”
एक दोस्त ने हँसते हुए कहा,
“हम छोड़ देंगे ना… आराम से।”
लड़की की आँखें भर आईं।
उसके हाथ काँप रहे थे…
और दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे लग रहा था अभी बाहर निकल आएगा।
उसने खुद को संभालते हुए कहा—
“प्लीज़… मुझे जाने दो…”
लेकिन जवाब में सिर्फ हँसी आई।
और तभी…
लड़की ने अचानक अपनी सारी ताकत इकट्ठा की…
धक्का!
उसने सामने वाले लड़के को पूरी ताकत से धक्का दिया।
लड़का लड़खड़ाकर पीछे गया,
और लड़की ने उसी पल पलटकर दौड़ लगा दी।
सीधे… सड़क छोड़कर…
उस तरफ जहाँ अंधेरा घना था।
जंगल की तरफ।
उसके नंगे पाँवों के नीचे कंकड़ चुभ रहे थे,
काँटे लग रहे थे,
लेकिन वो रुकी नहीं।
पीछे से गालियाँ और हँसी की आवाज़ आई—
“ओये! भाग गई!”
“पकड़ो इसे!”
“आज तो मज़ा आएगा!”
चारों उसके पीछे दौड़ पड़े।
उनके कदम भारी थे…
पर लड़की की जान हल्की थी,
वो जैसे हवा में भाग रही थी।
जंगल में घुसते ही रास्ता बदल गया।
सड़क की रोशनी पीछे रह गई…
अब बस पेड़ों की परछाइयाँ थीं…
और उसकी अपनी सांसों की आवाज़।
वो भागती रही…
भागती रही…
लेकिन अचानक उसका पैर किसी जड़ से टकराया—
और वो लड़खड़ाकर आगे गिरते-गिरते बची।
उसने खुद को संभाला…
और कांपते हाथों से एक पेड़ के पीछे छिप गई।
उसकी सांसें अब भी तेज़ थीं…
आँखों से आँसू गिर रहे थे…
और तभी…
पास ही झाड़ियों में किसी के कदमों की आवाज़ आई।
धीमे…
बहुत धीमे…
और एक शराबी आवाज़ फुसफुसाई—
“कहाँ गई…? अभी तो यहीं थी…”
लड़की ने अपनी हथेली मुँह पर रख ली,
ताकि उसकी सांस की आवाज़ बाहर ना निकले…
आगे सुनो…
जैसे ही उस लड़के की पकड़ उसकी कलाई पर और कसने लगी,
लड़की की आँखों में डर के साथ-साथ एक आख़िरी हिम्मत भी जाग उठी।
उसने एक पल भी नहीं सोचा।
और अगले ही सेकंड…
उसने उसके हाथ पर जोर से काट लिया।
“आहहहह…!!”
लड़का चीख पड़ा, उसकी आवाज़ जंगल में गूँज गई।
उसने झटके से हाथ पीछे खींच लिया,
और गुस्से में उसे धक्का देने ही वाला था…
लेकिन लड़की…
वो रुकने वाली नहीं थी।
वो उसी पल पलटी,
और अपनी पूरी ताकत से भाग पड़ी।
उसके नंगे पैर मिट्टी, पत्थर, काँटे सब पर पड़ रहे थे…
लेकिन उसे दर्द महसूस ही नहीं हो रहा था।
उसके कानों में बस एक ही आवाज़ थी…
भागो… भागो… भागो…!
पीछे से लड़कों की गालियाँ और दौड़ने की आवाज़ फिर से शुरू हो गई।
“पकड़ो इसे!”
“आज बचने नहीं देंगे!”
लड़की भागते-भागते रो रही थी…
उसकी सांसें टूट रही थीं…
और आँखों के आगे अंधेरा छाने लगा था।
लेकिन वो फिर भी दौड़ती रही…
और तभी…
धस्स्स…!
उसके कदमों के नीचे की जमीन अचानक… धंस गई।
लड़की की आँखें फैल गईं।
उसने खुद को संभालने की कोशिश की,
लेकिन मिट्टी जैसे उसके पैरों को निगलने लगी।
“न-नहीं…!”
उसने चीखकर पास की झाड़ी पकड़नी चाही…
पर हाथ खाली रह गया।
और अगले ही पल…
वो सीधा नीचे गिर गई।
अंधेरे में…
ठंडी मिट्टी के बीच…
जैसे किसी ने जमीन का दरवाज़ा खोल दिया हो।
उसकी चीख ऊपर तक गई…
और फिर सब कुछ एकदम खामोश हो गया।
ऊपर जंगल में चारों लड़के अचानक रुक गए।
उनकी सांसें तेज़ थीं,
पर चेहरे पर अब नशा नहीं…
डर था।
एक ने कांपते हुए जमीन की तरफ देखा…
जहाँ लड़की गायब हुई थी।
“ये… ये कहाँ चली गई?”
दूसरे ने पीछे हटते हुए कहा—
“भाई… ये जगह ठीक नहीं है…”
और तभी…
उस धंसी हुई जमीन के अंदर से
एक बहुत हल्की-सी आवाज़ आई…
जैसे कोई पत्थर… किसी पुराने दरवाज़े पर सरक रहा हो।
कrrrr… कrrrr…
चारों की रूह काँप गई।
और नीचे…
जहाँ लड़की गिरी थी…
वो दर्द से कराहती हुई उठने की कोशिश कर रही थी।
चारों तरफ अंधेरा था,
लेकिन ये अंधेरा साधारण नहीं था…
तो दोस्तों कैसे हो आप लोग 🤗
कैसा लगा आपको ये एपिसोड मुझे जरूर बताएगा 🥺🥲

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Sirf Sadharan

Pro
सादा जीवन उच्च विचार जीवन का हो आधार